तुम्हारे बारे में...❣️☘️

तुम्हारे बारे में...

ऐसे ही कब तक मेरी कल्पनाओं में आती रहोगी....🙂 

ना चाहते हुए भी, तुम्हारी यादों में खोए रहना तुमको लेके इतनी कल्पनाएं करना जैसे मानों तुम मेरी विद्युत अभियांत्रिकी की कोई किताब हो.....! 

वैसे तुम मेरे लिए एक सकारात्मक ऊर्जा की आइडियल सोर्स हो, जिससे इतनी पॉजिटिविटी निकलती है... अनंत... असीम..... सूर्य की किरणों की तरह.....❣️☘️

तुम इतनी शांत, सरल और गंभीर कैसे हो...?

मैं समझ नहीं पाता...; मैं चाहता हूं जानना, समझना, तुम्हारे बारे में..सब कुछ... शून्य से शिखर तक..... लेकिन असफल रह जाता हूं।

जब तुम्हारे अधरों से वो स्वर निकलते हैं जिनके लिए मेरे कान एकदम खड़े रहते हैं....तुम्हारे अधरों को थरथराने से ही मेरे हृदय में कोलाहल होने लगता है, रक्तचाप बढ़ जाता है और हीमोग्लोबिन की सांद्रता कम हो जाती है तब रक्त ऐसे प्रवाह में होता है जैसे अरुई की पत्ती पर जल की एक बूंद....!

काश मैं तुम्हारे साथ दो कदम और चल पाता...! और कह पाता कि मैं तुम्हारा हाथ थामना चाहता हूं अनंतकाल के लिए, हमेशा के लिए.... जन्मों जन्मांतर तक, अंतिम सांस तक....लेकिन शायद मैं नहीं कह पाऊंगा... क्योंकि मुझे डर लगता है तुमको खोने से.......!

बहरहाल.....; ये सब कल्पनाओं में ही रह जायेगा !

तुम कहना कि सारा कुछ एक दिन बदल जाएगा और मैं मान लूँगा। फिर कहना कि उस सारे बदलाव के बावजूद आसमान गहरे नीले रंग का ही होगा और उसमें सफ़ेद बादलों में हमें अपनों का चेहरा कभी भी दिख जाएगा, जिन्हें हम खो चुके हैं। 

क्या तुम कह पाओगी कि हर खो जाने को हम पा लेने से बदल सकेंगे ?

जब कुछ बहुत बुरा अपने चरम पर घट रहा होगा, क्या तब तुम सिरहाने आकर अपने कोमल हाथ माथे पर फेरकर जगा दोगी ? 

क्यों हम किसी के खो जाने के ठीक पहले तक उसे बता नहीं पाते हैं कि हम उन्हें कभी खोना नहीं चाहते हैं।

अगर हम सब क्षणिक हैं तो तुम जीवन हो ! क्या कभी मिलोगी नहीं, इस घड़ी के बंद होने से पहले ?

तुम्हारे बारे में...🙂


बेवजह के तेरे मेरे ख्याल...❣️☘️


- राहुल कुमार यादव
बागी बलिया, उत्तरप्रदेश 

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